Almora Dharm Uttarakhand

अल्मोड़ा के श्रद्धालुओं के लिए खुला जागेश्वर धाम

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अल्मोड़ा। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में आठवें ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थित जागेश्वर धाम के कपाट जिले के श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बुधवार को खोल दिये गए हैं। लगभग तीन माह से अधिक समय के बाद जिले के श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोले गए। श्रद्धालु पूर्वाह्न आठ बजे से अपराह्न पांच बजे तक मंदिर के दर्शन कर सकेंगे।
जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के प्रबंधक भगवान भट्ट ने बताया कि कोरोना संक्रमण के मद्देनजर श्रद्धालुओं का मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश वर्जित होगा और प्रसाद अथवा जल अर्पित करने पर भी मनाही है। मंदिर की घंटियों को बांधा गया है। मंदिर वर्तमान में केवल अल्मोड़ा जिले के श्रद्धालुओं के दर्शन मात्र के लिए खोला गया है। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं के बारे में बताया कि सर्वप्रथम आरतोला नामक स्थान पर बनाए गए प्रथम जांच केन्द्र पर श्रद्धालुओं का पंजीकरण होगा और पहचान पत्रों की जांच के उपरांत प्रत्येक श्रद्धालु को पास जारी किया जाएगा। जहां सभी श्रद्धालुओं को सैनिटाइज करने के साथ ही उनकी थर्मल स्कैनिंग भी की जाएगी। आरतोला से जागेश्वर मंदिर समूहों के दर्शन करने हेतु श्रद्धालुओं के लिए एक घंटे का समय निर्धारित किया गया है। मंदिर से 100 मीटर की दूरी पर स्थित टीआरसी द्वार पर दूसरा जांच केन्द्र निर्मित किया गया है। यहां आरतोला से जारी हुए पास की पंजिका (इंट्री) होगी और दोबारा से श्रद्धालुओं की थर्मल स्कैनिंग कर उन्हें सैनिटाइज किया जाएगा। इस स्थान से प्रत्येक श्रद्धालु को मंदिर में प्रवेश एवं दर्शन कर बाहर आने के लिए केवल दस मिनट का समय दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि दस-दस श्रद्धालुओं के दल को सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा और प्रवेश से पूर्व मंदिर द्वार पर बनाए गए एक अन्य जांच केन्द्र पर भी श्रद्धालुओं की थर्मल स्कैनिंग होगी और उन्हें सैनिटाइज किया जाएगा। भट्ट ने कहा मंदिर के दर्शन और परिक्रमा करने के बाद श्रद्धालु निकासी द्वार से बाहर आएंगे।
उन्होंने बताया कि तीनों ही जांच केन्द्रों पर श्रद्धालुओं को जारी हुए पास पर उनके प्रवेश एवं बाहर आने का समय दर्ज किया जाएगा।
मंदिर में पूर्व की भांति ऑनलाइन पूजा जारी रहेंगी और ऑनलाइन पूजा हेतु पंजीकरण तीनों ही जांच केन्द्रों सहित मंदिर परिसर में भी कराया जा सकता है। भट्ट ने यह भी बताया कि मंदिर में प्रात: काल पूजा, भोग पूजा और सांयकालीन आरती नियमित रूप से की जा रही है।

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